आजकल, भारत की सम्पत्ति को लेकर बहुत विज्ञापन हो रही है, लेकिन वास्तविकता कुछ विपरीत है। आंकड़े बताते हैं कि नौकरी की कमी की अनुपात शिकायत की जा रही है है, खासकर जवानों के बीच। इशारा यह उठता है कि क्या यह सब केवल एक प्रचार तंत्र का हिस्सा है, जिसका मकसद शासन को बेहतरीन दिखाने का है? आवश्यकता है कि
क्या प्रचार ही सब कुछ है? बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और जनता की हकीकत
आजकल | अब | वर्तमान में ज़माने | युग में, प्रचार | विपणन | बनावट ही राजनीति | सरकार | व्यवस्था का मुख्य | अहम | महत्वपूर्ण हिस्सा बन | गया | लगता है। लेकिन | पर | फिर भी क्या सिर्फ | केवल | बस प्रचार | विपणन | बनावट ही सब | हर | पूरा कुछ है? वास्तविकता | असलियत | सच्चाई यह है कि बेरोजगारी | बेरोज